October 27, 2020

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800 रूपये किलो बिकने वाला काजू भारत के इस शहर में बिकता है सिर्फ 20 रूपये किलो

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काजू खाने या खिलाने का नाम आते ही लोगों का ध्यान जेब की तरफ चला जाता हैं और जाए भी क्यों ना आखिरी काजू की कीमत भी बहुत होती हैं। लेकिन अगर हम आपसे कहे कि एक ऐसी जगह भी हैं जहां पर काजू की कीमत आलू-प्याज से भी कम हैं? बातें नहीं बना रहे हैं, सच बता रहे हैं। अगर आप दिल्ली में काजू खरीदते हैं तो आपको एक किलो काजू के बदले में आपको अपनी जेब से करीब 800 रूपये ढीले करना पड़ेगें।

लेकिन अगर हम दिल्ली से करीब 12 सौ किलोमीटर दूर झारखंड में पहुंच आए तो यहां पर काजू बेहद ही सस्ते है। सूबे के जामताड़ा जिले में काजू 10 से 20 रुपये प्रति किलो में मिल जाते हैं। जामताड़ा के नाला में करीब 49 एकड़ में फैले इलाके में काजू के बागान हैं।

काजू को बागान में काम करने वाले बच्चे और महिलाएं बेहद सस्ते दामों में बेच देते हैं। काजू की फसल में मुनाफा होते देख इलाके के काफी लोगों का रुझान भी इस तरफ बढ़ता जा रहा है। यह बागान जामताड़ा ब्लॉक मुख्यालय से करीब चार किलोमीटर की दूरी हैं।

बागान बनने के पीछे का मजेदार किस्सा

सबसे खास बात यह है कि काजू की जामताड़ा में इतनी बड़ी पैदावार चंद साल की मेहनत के बाद शुरू हुई। स्थानीय लोग बताते हैं कि जामताड़ा के पूर्व उपायुक्त कृपानंद झा को काजू खाना काफी पसंद था। इसी के चलते उन्होंने सोचा कि जामताड़ा में काजू के बागन बन जाए तो वो ताजे और सस्ते काजू खा सकते हैं।

इसी के चलते कृपानंद झा ने ओडिशा में काजू की खेती करने वालों से मुलाकात की। उन्होंने जामताड़ा की भौगोलिक स्थिति के बारे में कृषि वैज्ञानिकों से पता कराया और इसके बाद शुरू हुई काजू की बागवानी। देखते ही देखते कुछ ही साल में यहां काजू के बड़े पैमाने पर खेत हो गए।

यहां से जाने के बाद कृपानंद झा ने निमाई चन्द्र घोष एंड कंपनी को केवल तीन लाख रुपए भुगतान पर तीन सालों के लिए बागन की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी। एक अनुमान के अनुसार हर साल बागन में हजारों क्विंटल काजू फलते हैं। लेकिन देखरेख के आभाव के चलते स्थानीय लोग और यहां से निकालने वाले काजू तोड़कर ले जाते हैं।

काजू की बागवानी में लगे लोगों का कहना हैं कि उन्होंने कई बार फसल की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार से गुहार लगाई हैं लेकिन उन्होंने कोई खास ध्यान नहीं दिया। पिछली साल सरकार ने नाला इलाके में 100 हेक्टेयर भूमि पर काजू के पौधे लगाए जाने की बात बताई थी।

विभाग ने पौधारोपण की सभी प्रकार की तैयारी पूरी कर ली हिं और अब राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत जिला कृषि विभाग को काजू पौधा लगाने की जिम्मेदारी दी गई हिया। लेकिन अभी तक इस पर काम शुरू नहीं हो पाया है। सरकार काजू की फसल बढ़ाने और उन्हें उचित मूल्य दिलाने का वादा करती रही हैं।

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