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अभय चौटाला ने गंवाया गढ़, फिर भी हार का गम कम और भतीजे दिग्विजय की हार की खुशी है ज्‍यादा ,देखें पूरी खबर

( रिपोर्ट – कमल मिड्ढा ): कभी चौधरी देवीलाल और ओमप्रकाश चौटाला का गढ़ रहे जींद में इनेलो बुरी तरह हार गई है ! यह अभय चौटाला के लिए बड़ा झटका है, लेकिन उनको इस हार के गम से अधिक भतीजे दिग्विजय चौटाला के नहीं जीत पाने की है ! वास्‍तव में इनेलो व अभय के लिए अपनी हार से अधिक बड़ा धक्का दिग्विजय की जीत साबित हो सकती थी ! यदि जननायक जनता पार्टी के दिग्विजय चुनाव जीत जाते तो यह अभय चौटाला के लिए यह अधिक चुनौती भरा होता ! लिहाजा इनेलो समर्थक जहां अपनी हार पर दुखी हैैं, वहीं जेजेपी की पराजय पर खुश भी हैैं !


वही अगर बात की जाए जींद उपचुनाव के नतीजे की तो राज्य के प्रमुख विपक्षी दल इनेलो के लिए सबसे अधिक कड़वाहट भरे रहे हैं ! इस नतीजे का असर इनेलो व बसपा की दोस्ती पर भी पड़ सकता है ! राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दोनों दलों की दोस्‍ती में दरार आने की आशंका बढ़ गई है ! इसके साथ ही अभय चौटाला के विधायकों के भी दूसरे दलों की तरफ मुड़ने के हालात बन रहे हैं ! ऐसे में लोकसभा चुनाव से पहले इनेलो में भगदड़ संभव है, जींद कभी इनेलो का गढ़ हुआ करता था ! यहां से दिवंगत विधायक डाॅ. हरिचंद मिढ़ा नौ साल तक इनेलो के विधायक रहे !

जींद उपचुनाव के आये नतीजों के बाद माना जा रहा है कि इनेलो में अभय चौटाला के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी ! उनके सामने नेताओं को पार्टी में रोकना सबसे बड़ी चुनौती होगी, उनके प्रत्याशी को साढे तीन हजार से भी कम वोट मिलने के बाद बहुजन समाज पार्टी द्वारा गठबंधन को जारी रखने पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है ! हरियाणा के राजनितिक सूत्रों की माने तो बसपा सुप्रीमो मायावती पहले ही दुष्यंत चौटाला और राजकुमार सैनी के संपर्क में भी हैं !

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