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हरियाणा कांग्रेस की आपसी फुट व “4 साल से पार्टी संघठन नहीं” भी बुरी तरह हुई हार की मुख्य वजह ,देखें पूरी खबर

( रिपोर्ट – कमल मिड्ढा ): हरियाणा में सत्ता की चौधर बांगर बेल्ट में लाने का दावा करते रहे कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता व जींद से उम्मीदवार रणदीप सुरजेवाला की हुई करारी शिकस्त से कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ गई हैं ! कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की कोर टीम में खास अहमियत रखने वाले रणदीप सुरजेवाला के तीसरे नंबर पर खिसकने का मतलब साफ है कि प्रदेश में कांग्रेस का भविष्य सुरक्षित नहीं है !

रणदीप सुरजेवाला भले ही अब इवीएम में गड़बड़ी के आरोप लगाकर अपनी हार को स्वीकार करने का साहस नहीं कर पा रहे, लेकिन उनकी हार ने पूरी कांग्रेस को आत्ममंथन के लिए मजबूर कर दिया है ! इस हार से लोकसभा चुनाव के लिए भी कांग्रेस के लिए हरियाणा मेंं खतरे की घंटी बज गई है ! कांग्रेस के लिए दुष्‍यंत चौटाला की पार्टी से भी पीछा रहने से बड़ा खतरा पैदा हो गया है !

रणदीप सुरजेवाला कांग्रेस के कद्दावर नेता माने जाते हैं ,सुरजेवाला के जींद के रण में कूदने से यह चुनाव राष्ट्रीय फलक पर हाई प्रोफाइल बन गया था , उन्हीं की वजह से पूरे देश की निगाहें जींद के चुनाव नतीजों पर टिकी हुई थी ! ऐसे में सुरजेवाला के तीसरे नंबर पर खिसकने का मतलब साफ है कि या तो उनका जनाधार मजबूत नहीं है या फिर कांग्रेस को अभी ग्राउंड पर बहुत अधिक मेहनत करने की जरूरत है !

हरियाणा कांग्रेस के बिच 4 साल से चल रही आपसी फुट व 4 साल से हरियाणा में पार्टी का संघठन न होना भी सुरजेवाला की हार का रहा एक मुख्य कारन

रणदीप सुरजेवाला अपनी हार के बाद इसका ठीकरा ईवीएम पर फोड़ रहे हैं ! उन्होंने ईवीएम में गड़बड़ी के सीधे आरोप लगाए हैं, लेकिन मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार राजीव जैन और पूर्व ओएसडी जवाहर यादव की दलील है कि यदि उन्हें ईवीएम में ही गड़बड़ी की बात कहनी थी तो जींद के रण में उतरने की जरूरत ही क्या थी !
दरअसल जींद उपचुनाव में छह खेमों में बंटे कांग्रेस के दिग्गजों ने पार्टी आलाकमान की सख्ती के बाद सार्वजनिक मंचों पर एकजुटता तो दिखाई, लेकिन पर्दे के पीछे भितरघात भी खूब हुई ! इसका बड़ा खामियाजा भी कांग्रेस को उठाना पड़ा, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर समेत अन्य नेताओं के जींद में डेरा डालने के बावजूद जिस तरह सुरजेवाला तीसरे नंबर पर फिसले, उससे हरियाणा कांग्रेस में शीर्ष स्तर पर बदलाव तय है !

कैथल से विधायक होने के बावजूद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा रणदीप सुरजेवाला को जींद के रण में उतारने की रणनीति विफल रही ! 22 हजार 740 वोट लेकर सुरजेवाला जैसे-तैसे जमानत बचाने में तो कामयाब रहे, लेकिन अब उनके सामने यह संकट खड़ा हो गया कि वह अब कैथल में कैसे लौटेंगे, उनके सामने कैथल या जींद में से किसी एक को चुनने की चुनौती होगी !

चुनाव प्रचार के दौरान जींद की चौधर को मुद्दा बनाने वाले सुरजेवाला ने अगर इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव में वापस कैथल का रुख किया तो उनके लिए वहां के मतदाताओं को जवाब दे पाना मुश्किल होगा ! हाल ही में हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी की जिम्मेदारी संभालने वाले गुलाम नबी आजाद से मुलाकात कर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के समर्थक विधायकों ने बाकायदा शिकायत भी की थी कि संगठन स्तर पर उन्हें किसी ने प्रचार के लिए नहीं बुलाया ,वही हुड्डा से लेकर अन्य विधायक अपने स्तर पर ही पार्टी के चुनावी अभियान में शामिल हुए ! आजाद के तेवरों से साफ है कि पार्टी प्रदेश में नया प्रधान ला सकती है !

इसके साथ ही राज्‍य में आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर भी संकट पैदा हो गया है, जींद उपचुनाव में जिस तरह कांग्रेस को दुष्‍यंत चौटाला जैसे नए नेता की नई नवेली जननायक जनता पार्टी से भी मात मिली वह उसके लिए बड़े खतरे की घंटी है, उसके लिए अब राज्‍य में खुद को दूसरे स्‍थान की पार्टी साबित करने की भी चुनौती खड़ी हो सकती है !

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